Saturday, June 20, 2009

क्या किसी मौलवी को इस तरह पेड़ से बाँधकर पीटा जा सकता है?

कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वामपंथियों ने बांग्लादेशियों और मुसलमानों को इस प्रकार से अपना घर जमाई बना लिया है कि अब वे रामकृष्ण मिशन के साधुओं को भी सरेआम पीटने लगे हैं। प्रस्तुत चित्र में रामकृष्ण मिशन के स्वामी पुण्यलोकानन्दजी महाराज को दक्षिण 24 परगना जिले में सीपीएम के गुंडों और स्थानीय मुसलमानों ने पेड़ से बाँधकर पीटा। कोई भी उन्हें बचाने आगे नहीं आया क्योंकि सीपीएम के गुण्डे हथियारबन्द थे (हमेशा रहते हैं), और एक स्थानीय बांग्लादेशी घुसपैठिया अब्दुल अली ने अपने मुस्लिम साथियों की मदद से स्वामी जी को लोहे के सरिये से पीटा। जब स्वामी जी बेहोश हो गये और भीड़ छँट गई तब उनके अनुयायियों ने उन्हें अस्पताल में भरती करवाया जहाँ उनके सिर का सीटी स्कैन करवाया गया। (चित्र में देखें…)







सवाल है कि - यदि किसी मौलवी को गुजरात में इस तरह पेड़ से बाँधकर पीटा जाता तो क्या-क्या होता? जवाब संक्षिप्त में दें… यह तो मैं भी जानता हूँ कि मामला संयुक्त राष्ट्र तक भी पहुँच सकता था, या जिस तरह से ग्राहम स्टेंस की बीबी को “भारत के प्रति योगदान” के लिये पद्मश्री दी गई ऐसा ही उस मौलवी की बीबी को सोनिया की ओर कुछ मिल जाता। क्या यह खबर आपने किसी सबसे तेज चैनल पर देखी है? हिन्दुओं की नपुंसकता के चलते, 2025 से पहले भारत का प्रधानमंत्री (सॉरी प्रधानमंत्री पद तो गाँधी परिवार के लिये आरक्षित है) / गृहमंत्री कोई बांग्लादेशी घुसपैठिया मुसलमान होगा, क्या अब भी आपको इसमें शक है?

36 comments:

पंगेबाज said...
This comment has been removed by the author.
jhad said...

सही हुआ जी यही होना भी चाहिये था साला हिंदु होने के साथ साथ हिंदु धर्म को मानता भी था . बाकी सारे हिंदुओ को भी पाक और बांगलादेश से बुलाये गये मुसलमानो से पिटवाना चाहिये था . और आप इस तरह की खबरे छाप रहे है दिनेश जी पहले दिखा दे वो आपको समझा कर इसे छापने से मना करदेंगे वरना उन्हे किसी सिरफ़िरे वकील को पढवाकर आप पर मुकदमा करवाना पडेगा आप परेशान होंगे

jhad said...

सही हुआ जी यही होना भी चाहिये था साला हिंदु होने के साथ साथ हिंदु धर्म को मानता भी था . बाकी सारे हिंदुओ को भी पाक और बांगलादेश से बुलाये गये मुसलमानो से पिटवाना चाहिये था . और आप इस तरह की खबरे छाप रहे है दिनेश जी पहले दिखा दे वो आपको समझा कर इसे छापने से मना करदेंगे वरना उन्हे किसी सिरफ़िरे वकील को पढवाकर आप पर मुकदमा करवाना पडेगा आप परेशान होंगे

jhad said...

सही हुआ जी यही होना भी चाहिये था साला हिंदु होने के साथ साथ हिंदु धर्म को मानता भी था . बाकी सारे हिंदुओ को भी पाक और बांगलादेश से बुलाये गये मुसलमानो से पिटवाना चाहिये था . और आप इस तरह की खबरे छाप रहे है दिनेश जी पहले दिखा दे वो आपको समझा कर इसे छापने से मना करदेंगे वरना उन्हे किसी सिरफ़िरे वकील को पढवाकर आप पर मुकदमा करवाना पडेगा आप परेशान होंगे

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

हिन्दुओं की यही आदत है. गुलाम कौम, गुलाम मानसिकता. पिटो, और फिर से गुलाम बनो. रो रहे होंगे सुभाष और भगत, राजगुरु और सुखदेव.

उपाध्यायजी(Upadhyayjee) said...

Gujrat me aisa hota to ab tak NDTV ke studio ke aage line laga rahta.
Sab kud padate ki meri awaj dikhai jaye jaise ki Mahsesh Bhatt, Teesta, Akhtar etc....
Manmohan singh ko neend nahin aati. Chidambaram ab tak Modi ko ek do jhapad lagane waale andaz me dhamkaaye hote. Lalu dhoti ka pachhua khosh kar buldozar par chadh gaye hote.
Congress, SP, RJD, CPM me hod mach jaati ki kiska dialogue sabse jyada ganda tha.
:)

मिहिरभोज said...

शब्द नहीं किस भाषा मैं आक्रोश व्यक्त करूं......

संजय बेंगाणी said...

भैये , हमने तो मान लिया है कि बंग्लादेशोयों के हाथो पीट पीट के ही मरना है एक दिन. अतः जब से "जय हो" का मंत्र जाप हमने शुरू किया है, दीमाग ही नहीं खून भी ठंडा पड़ गया है. मेरी मानो आप भी "जय हो" का जाप शुरू कर दें, आपका खून बहुत उबालता है.

Mired Mirage said...

यही क्यों, फ़िल्मों में सदा दिखाया जाएगा कि मौलवी और चर्च के पादरी भले मानुष, पंडित जी पिशाच।
आपने सुना नहीं, 'अतिथि देवो भव:' सो मार खाइए, बांग्लादेशी अतिथियों के हाथ!
घुघूती बासूती

रंजना said...

Agle janam hame HINDU na kijo....

Vivek Rastogi said...

अरे हिन्दू तो होते ही पिटने के लिये हैं, और पृथ्वीराज के बाद तो शायद कोई मर्द हिंदु राजा हुआ ही नहीं जिसने हर बार मुसलमान राजा को हराया और छोड़ दिया। अगर उस समय भी इस तरह की एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसी संस्था होतीं तो राजा पृथ्वीराज का क्या होता?

उसके बाद तो बस ऐसे लोगों से काम चलाने पड़ाना रहा हूँ जिनको यूएस वीजा नहीं देता है।

शायद हिन्दुओं के खून में सोचे समझे ढ़ंग से पानी मिला दिया गया है।

मैं मुस्लिम विरोधी नहीं पर आतंक विरोधी गतिविधियों के संचालन का विरोधी हूँ। बस एक जबाब खोजने की कोशिश करता हूँ कि घाटी में या दुनिया में हर आतंक के पीछे केवल मुसलमान क्यों होता है, हिन्दू क्यों नहीं।

Ravi Singh said...

वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति

अर्थात वैदिक मत मानने वालों के प्रति की गई हिंसा हिंसा नहीं होती
लाल चड्डी वाले तो इस पर प्रतिक्रिया देने के बजाय अपनी घुटनों में मुंह छिपाकर बैठे होंगे

Kajal Kumar said...

बेचारे T.V. चैनलों को यह खबर दिखने के लिए स्पांसर नहीं मिल रहा होगा.
और न ही कहीं कोई 'बहुमत आयोग' है. यहाँ केवल 'अल्पमत आयोग' होते हैं.

तपन शर्मा said...

क्या कहा जाये अब... ऊपर अभी ने अपने विचार तो रख ही दियेहैं... सही कहा रंजना जी..
अगले जन्म हमें हिन्दू न कीजो...
बाकी धर्म का होना बुरा नहीं है.. लेकिन काँग्रेस और बाकी दलों ने जिस तरह से "अल्प संख्यकों" का फ़ायदा उठाया है उससे दुख होता है... पर फ़िलहाल यही कर सकते हैं कि ऐसे मुद्दों को सब तक पहुँचाने का काम हम स्वयं करें... NDTV जैसे चैनलों का इंतज़ार करना फ़िज़ूल है...

गिरिजेश राव said...

स्यापा करने के बजाय पहले घटना का पूरा अगाड़ा पिछाड़ा जानना आवश्यक है - इसलिए नहीं कि इस घटना में तर्क ढूढ़ना है, इसलिए कि तालिबानी और इस्लामी गुण्डों की कार्य प्रक्रिया के एक और पक्ष पर प्रकाश पड़े। इसलिए और भी की घटना कितनी सच्ची है? बहुसंख्यकों के लिए सतर्कता अति आवश्यक है।
ये हर तरफ सक्रिय हैं। यहाँ तक की ब्लॉग पर भी अपनी बकवास छापने और बेशर्म होकर उसे न्यायोचित ठहराने में नहीं चूकते।इनकी कलुषतापूर्ण सक्रियता का उदाहरण देखिए कि हिन्दी ब्लॉग के शैशवाकाल में ही यहाँ धर्म परिवर्तन और क़ुरानी बकवासों के मंच स्थापित हो चुके हैं।

और इन्हें समर्थक भी मिल जाते हैं। विचार स्वतंत्रता का तर्क लेकर।

स्वामी जी ने चाहे जो किया हो, इस देश के नागरिक होने के कारण इस तरह से अपमानित होने और प्रताड़ना के शिकार होने से सुरक्षित रखने के लिए संविधान में व्यवस्थाएँ हैं। लेकिन कार्यपालिका तो अलग ही नशे और दृष्टिदोष से पीड़ित है। रामकृष्ण मिशन जिसने कभी हिन्दू समाज से अलग अल्पसंख्यक होने का दावा किया था (ये बात अलग है कि भीख नहीं मिली), इस घटना पर क्या कर रहा है? यह जानना इसलिए और आवश्यक है कि योद्धा सन्यासी विवेकानन्द की परम्परा विकसित (?) होती कहाँ तक पहुँच चुकी है?

हमें विलाप करने और रुदाली की भूमिकाओं से बाज आना होगा। देश के दूसरे कोने में बैठे हम लोग क्या कर सकते हैं? अपने पास ही घटे तो हममें से कितने बाहर आएँगें आन्दोलन के लिए? आवश्यकता है दैनिक घटनाओं में भी इन तालिबानिओं और धर्मान्धों की पहचान और कोई भी अवांछित घटना पर, चाहे वह कितनी ही छोटी क्यों न हो, तुरंत कार्यवाही की। ऐसा करना आसान है। इससे इस नासूर को घातक ज़हरबाद में बदलने से रोका जा सकता है। और जब यह अंकुरित हो रहा हो तब इससे निबटना आसान है।

बंगाल में यह विष वृक्ष बन चुका है। राजसत्ता जिसने इसका पोषण किया, आज इसके सामने पराजित है। यह घटना केवल 'अलग सी घटना' नहीं है, बंगाल के गाँवों, शहरों में गली गली फैल चुकी विषबेल की एक फुनगी भर है। अगर आप नहीं चेते तो कल आप के साथ भी ऐसा हो सकता है - विश्वास नहीं होता? जरा पता लगाइए आप के इलाके में कितने बंगलादेशी घूम रहे हैं?

गुजरात में जो हुआ, उसके औचित्त्य और अनौचित्त्य पर विचार नहीं कर रहा, वह वर्षों से झेलती जनता का विद्रोह था - दैनिक इस्लामी आतंकवाद और पारम्परिक शासन के घटिया सेकुलरी पाखण्ड के विरुद्ध। सताई और पगलाई भीड़ के अपने तर्क होते हैं, आप के लेक्चरों से उन्हें फर्क नहीं पड़ता, तब और जब कि वह बुद्धिजीवियों की नपुंसकता देख चुकी हो।

शायद आप के इलाके में इस घटना जैसा भी हो सकता है, आप नहीं सोचते लेकिन कश्मीर, पाकिस्तान, बंग्लादेश के हिन्दुओं ने भी ऐसा ही सोचा था ।

परमजीत बाली said...

यह सब देख सुन कर बहुत दिल दुखता है। किसी के साथ भी ऐसी बरबर्ता हो और दोषीयों को कोई सजा ना मिले......

शायद इसी लिए मेरा भारत महान है:))

महफूज़ अली said...

सवाल यहाँ हिन्दू और मुसलमान का नहीं है..... यह सरकार का दोहरा चरित्र है....... तुष्टिकरण है...... यहाँ सवाल इंसानियत का है....

इसमें मुसलामानों की कोई गलती नहीं है...... उनका शोषण ही उनको हिन्दुओं से डराकर किया जाता है.....

जिस दिन मुसलमान यह समझ जायेगा ....उस दिन मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति ख़त्म हो जायेगी.....

Anil Pusadkar said...

हम अपने ही घर मे लात खाने वाले दुनिया के सबसे बदनसीब लोग हैं।

संदीप शर्मा said...

आपकी पोस्ट पढ़कर बेहद दुख हुआ, और उससे भी अधिक हुआ यहां आए कमेंट्स पर। किसी कमेंट में साथüक जवाब नहीं है। कोई कह रहा है कि हिंदुस्तानी हैं ही जूते खाने के लिए, कोई कह रहा है कि जल्द ही बांग्लादेशी हम पर राज करेंगे। किसी ने कहा कि अतिथि देवो भव है इसलिए जूते खाओ। कोई कह रहा है अगले जनम हिन्दू न कीजो। जितनों ने भी कमेंट किए, बस मजाक-मजाक में कर दिए। सिर्फ इसलिए कि पोस्ट पर उनकी उपस्थिति दर्ज हो जाए। क्या इतना काफी है। हालांकि मैं भी सिर्फ कमेंट ही कर रहा हूं। इससे अधिक और कर भी क्या सकता हूं। लेकिन एक पीड़ा जो हिन्दू और उससे भी अधिक मानव होने के नाते होनी चाहिए थी, वह मैं महसूस कर रहा हूं। टीवी चैनल तो अब दस सालों से आए हैं। वो होते कौन हैं समाज सुधार का ठेका उठाने वाले। वहां का प्रशासन क्या सोता रहा है। पीड़ित स्वामी का चाहे कोई अपराध हो या ना हो, इस तरह की बबüरता की तुलना सिर्फ तालिबान से कर सकते हैं। हमारे यहां ऐसे सड़क पर न्याय नहीं होता। मुस्लिम, इसाई, हिन्दू सभी भारत के अंग हैं। चाहे गुजरात में मुस्लिम के साथ बर्बरता हो या बंगाल में हिंदू के साथ दोनों ही घटनाओं से एक भारतवासी को सदैव पीड़ा पहुंचती है।

प्रवीण शर्मा said...

Girijesh Rao ji ka comment hi hamara comment mana jaaye.

कौतुक रमण said...

जो आदमी स्वामी जी को बांध रहा है उसके हाथ का लाल धागा और गले की माला से मुझे तो लगता है वह हिन्दु है. नहीं?

Vivek Rastogi said...

@संदीप शर्मा जी,
वहां का प्रशासन सो रहा है आपको अभी तक पता नहीं चला अरे नंदीग्राम, लालगढ़ और बांग्लादेशियों को समर्थन और भी बहुत कुछ तभी तो हरेक ब्लागर यहां चिल्ला रहा है।

वाकई प्रशासन सो रहा है बंगाल का भी और भारत का भी ।

गिरिजेश राव said...

@कौतुक रमण

कौतुक जी वैसे आप ने सतर्कता तो दिखाई है लेकिन वह बाँधने के बजाय खोल रहा है, यह आप के दिमाग में नहीं आया?

यह भी तो हो सकता है कि पहला फोटो बाद का हो।

'कौतुक' से निहारते लुंगीधारी के बारे में क्या कहना है आप का?

एक और पहलू :सीपीएम का हिन्दू कार्यकर्ता भी तो लाल धागा बाँध सकता है और माला पहन सकता है? जगजाहिर है कि बंगाल की दुर्गा पूजा में सीपीएम वालों को 'धार्मिक अफीम' की महक नहीं आती।

मैंने इसीलिए कहा कि इस घटना का अगाड़ा पिछाड़ा जानना समझना आवश्यक है। 'हिटलर' से यह अनुरोध है कि तफशील दें।

गिरिजेश राव said...

अंग्रेजी में तफशील यहाँ है जो शर्मनाक है:

http://rajeev2004.blogspot.com/2009/06/ndtv-pics-swami-punyalokananda-of-rkm.html

हाँ, फोटो courtesy: NDTV

बालसुब्रमण्यम said...

पोस्ट में पूरी जानकारी नहीं है, इसलिए कुछ भी न कहना ही बेहतर होगा। यदि आप पूरे प्रकरण की जानकारी दे सकें, कि भीड़ इस स्वामी पर इतना क्रुद्ध क्यों हुई कि उसे पेड़ से बांधकर पीटना जरूरी समझा, तो कोई राय भी दी जा सकती है इस प्रकरण में। ऐसा क्या किया था स्वामी जी ने कि उनकी यह हस्र कर दी गई?

वैसे मैं गिरिजेश जी के उत्तर से पूर्णतः सहमत हूं, और उनके प्रति आभार भी जताता हूं कि, उन्होंने इस प्रकरण पर संतुलित रुख अपनाया और सही और पूर्ण जानकारी की मांग की। उन्होंने सही कहा है कि बहुसंख्यक समुदाय पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां होती हैं, जिन्हें उसे निभाना चाहिए।

रामकृष्ण मिशन ने टैक्स आदि में फायदा प्राप्त करने के इरादे से एक बार यह सिद्ध करने की कोशिश की थी वह हिंदू संप्रदाय नहीं है। स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस की विरासत को उन्होंने इस गर्त तक पहुंचा दिया था। यह बात भी गिरिजेश ने बताई है। अतः किसी भी गेरुए वस्त्रधारी पर किसी भी कारण से की गई हिंसा को हिंदुओं के प्रति किए गए अपमान के रूप में प्रस्तुत करना कौमी उन्माद भड़काने के समान है। यह सभ्य लोगों का काम नहीं है। पहले पूरे तथ्य पेश किए जाने चाहिए थे।

हां मैं यह जरूर कहूंगा कि मानवता का यह तकाजा है कि किसी को भी, चाहे वह बंग्लादेशी घुसपैठी हो, तालिबानी आतंकवादी या कोई हिंदू संत, इस तरह सरे आम पीटना न्याय-विरुद्ध है, असभ्य है और अनुचित है।

मनुष्य होने के नाते उसके कुछ हक बनते हैं जिसका किसी भी स्थिति में उल्लंघन नहीं होना चाहिए था।

Sundararaman said...

बालसुब्रह्मण्यम का वक्त्व्य इस बात पर ध्यान नही दे रही है कि इस तरह की असभ्य पिटाई पर मीडिया ध्यान नही दे रही है जितना वह गैर हिन्दु लोगों की पिटाई या ऐसि असभ्य बर्तावों पर दे रही है।

Arun Kumar Jha said...

सवाल यहाँ हिन्दू और मुसलमान का नहीं है..... यह सरकार का दोहरा चरित्र है....... तुष्टिकरण है...... यहाँ सवाल इंसानियत का है....

इसमें मुसलामानों की कोई गलती नहीं है...... उनका शोषण ही उनको हिन्दुओं से डराकर किया जाता है.....

जिस दिन मुसलमान यह समझ जायेगा ....उस दिन मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति ख़त्म हो जायेगी..main mahfuj bhai ki baton ka samarthan karta hun. .sath hi main yeh kahna chahunga ki aap hindu-muslman keyon bante hain? Insan baniye na, to kisi ko koi pitega to dukh sabhi ko hoga. apne aviveki aankh aur dimag se HINDU-MUSLMSN KE CHASMA UTAR KSR INSANIYT KA CHASMA PAHNIYE NA: MARNE AUR MARNE WALI VIKRIT MANSIKTA KO CHHODIYE NA. KIYON RAJNITIKO KE HATH KE KHILAUNA BANNA CHAHTE HAIN. CHAIN SE EK SATH RAHKAR DIKHIYE NA. BADA AANAD AAYEGA. SAR KATANE AUR KATNE KI BHASHA BHI CHHODIYE NA. AAPSE JYADA UBAL KHUN MEN HAME BHI HAI. LEKIN AAPKE SATH PAGAL BANNE KI PRAKRIYA KO TYAGIYE NA.
ARUN KUMARJHA

Jeet Bhargava said...

Excellent. Keep It up. First of all Boycott the so-called Secular media...like NDTV etc. Also Boycott the products which are advertised in these media.

naveentyagi said...

quraan ki सुरा ९ आयत ५ में लिखा है,......."फ़िर जब पवित्र महीने बीत जायें तो मुशरिकों (मूर्ती पूजक) को जहाँ कहीं पाओ कत्ल करो और उन्हें pakdo व घेरो और हर घाट की जगह उनकी ताक में बैठो। यदि वे तोबा करले ,नमाज कायम करे,और जकात दे तो उनका रास्ता छोड़ दो। निसंदेह अल्लाह बड़ा छमाशील और दया करने वाला है। "
सुरा ४ की आयत ५६ तो मानवता की क्रूरतम मिशाल पेश करती है ..........."जिन लोगो ने हमारी आयतों से इंकार किया उन्हें हम अग्नि में झोंक देगे। जब उनकी खाले पक जाएँगी ,तो हम उन्हें दूसरी खालों से बदल देंगे ताकि वे यातना का रसा-स्वादन कर लें। निसंदेह अल्लाह ने प्रभुत्वशाली तत्व दर्शाया है।"

jinda chod diya yahi bhut badi baat hai.

naveentyagi said...

समाचार पत्र -----राष्ट्र समिधा
राष्ट्र समिधा नाम से मेने एक समाचार पत्र (पाक्षिक) की शुरुआत की है। नवम्बर माह के पहले सप्ताह में इसका पहला अंक निकलेगा। आप सभी से प्रार्थना है की आप हमारे समाचार पत्र को अपने लेख व सुझाव भेजे। साथ में अपना पता,दूरभाष व ईमेल लिखें।
मेरी ईमेल आइ० डी0 naveenatrey@gmail.in है। आप इस पते पर अपने लेख भेज सकते है।

अग्रिम धन्यवाद सहित -------नवीन त्यागी

Common Hindu said...

http://hinduonline.blogspot.com/


Before the grand lanch function of "Bharat Swabhiman Mission"
Baba Ramdev seems to be genueinly interested
in the betterment of desh, dharam, rajniti
and i used to watch him on Aastha channel regularly

But right from the lanch function of "Bharat Swabhiman Mission"
where Babaji had invited a Shia Muslim maulaavi
and introduced him as his darling brother
speeches of Babaji has lost its sharpness
for the protection of desh, dharam, rajniti

Maybe its the price one has to pay
to garner support of all residing in india
and whether they are muslim
it does not matter

As a common hindu
what more could i have done but
only stopped actively watching Babaji
from that lanch function
though i still regard Babaji
as a great yoga master
and for his oratory skills

But, now in the present controvercy
of Devband fatva against Vande Mataram
attended by Babaji and home minister
hindus should protest and show their displeasure
to both Babaji and home minister
for agreeing to be a part of function
working against the spirit of Bharat
and consolidating/ fanning the Jihadi movement

As politicians support Jihadis
for capturing muslim vote bank
is Babaji trying to capture
muslim and sickular followers
by agreeing to attend Jihadi function
and not speacking out against
the fatva then and there
not even 2 days after that

all this when Babaji is
the most outspoken hindu guru
who is more than ready to
give sound bytes on each and every
topic including yoga
and never take any nonsense
laying down from any celebrited reporters/ editors

is it that like all other leaders
whether they are politicians or not
they are always supporting Jihadis
at the cost of hindus
and like them Babaji too
wants to capture muslim and sickular followers
and / or
even Babaji fears from Jihadis

O Hindus come out of your hibrenation
how long you want to wait
for things to get worse
before trying for their recovery

its easy to get charged up against Jihadis
but path to recovery goes first
by winning over the sickular hindus

O Hindus, this is the time
to lanch campainge against
all sickular hindus
in the form of Babaji
and dont wait for RSS/ BJP/ VHP
dont look forward for their orders
listen to your heart/ mind

Babaji has a reputation
of coming out sucessfully
from every controvery in the past
which where lanched by sickulars
but this time
if common hindus campainge
against his sickular tendencies
at least he has to say sorry
for his moments of weakness

i appeal all PRO-HINDU bloggers
to write-up on this topic from their heart
so that greater clearity and publicity to
hindu's view emerage in media

also remember that
blogging alone cannot provide
answers to worldly problems.


http://hinduonline.blogspot.com/2009/11/original-post-no-4-o-hindus-come-out-of.html



.

Dr. shyam gupta said...

क्योंकि हम शर्म-निरपेक्ष हैं ।

Meenu Khare said...

भारतीय नागरिक के साथ गिरिजेश राव और महफूज़ अली की बातों से भी सहमत. वास्तविकता में हिन्दू होते ही ग़ुलाम मानसिकता के हैं, पिटना ही उनका प्रारब्ध है. शर्मनिरपेक्षता ज़िन्दाबाद.

Shafiqur Rahman khan yusufzai said...

जी सर जी गुजरात में बस औरत का पेट फाड़ दिया जाता है...........और सजाएं मुसलमानों को ही मिलती है........गुजरात के दंगों में मुसलमानों के आलावा किसी को सजा नहीं मिली.........महारास्त्र में बम विस्फोट के जिम्मेदारो को सजा मिल गयी मगर दंगो का बादशाह श्रीकृष्ण आयोग की रिपोर्ट पर बैठा है.......बाला साहेब कानून से ऊपर हैं ?.........
सवाल और बहस ऐसी नहीं होनी चाहिए..........कानून और प्रशासन अगर किसी भी प्रकार पक्ष-विपक्ष करेगा तो ये उस समाज के लिए अहितकर है......आप हिन्दू हों मुसलमान हो स्वर्ण हों या दलित .........कानून अपने तरीके से काम करे यही बेहतर है
वैसे आपकी जानकारी के लिए पिछले साल नॉएडा में एक मौलवी को पिटा गया था......सच्ची!!!!!!! अब तो खुश

चंदन कुमार झा said...

घड़ा भरने दीजिये, यह भरेगा, फूटेगा और बाढ़ भी लायेगा……साफ सुथड़ा हो जायेगा सबकुछ ।

राहुल पंडित said...

chandan jo ghada bhar gaya hai,aur jaldi hi phutega,wait karie..........
hum taiyar hain